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जकड़न दूर करने का बंगाली मंत्र
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### 1. मंत्र का उच्चारण (Recitation)


> "हाते खिल पाये खिल आर खिल जान्नाते।

> सर्बाङ्गेते पड़िलो खिल के पारे राखिते।

> पारे एक नरसिंह जिनि सिद्धिगुरु।

> आर पारेन कृष्णचंद्र जिनि कल्पतरु॥

> गुरुर आज्ञाय मंत्र करिया ग्रहण।

> [रोगी का नाम]-एर खिलधरा झाड़ि भक्तियुक्त मन॥

> दोहाई नरसिंह गुरुर दोहाई।

> कार आज्ञे?

> काउरेर कामाख्या देबीर आज्ञे।

> कार आज्ञे?

> हाड़िर झि चण्डीर आज्ञे॥"

### 2. मंत्र का हिंदी अर्थ (Meaning)

*मंत्र का भावार्थ इस प्रकार है:*

हाथों में खिंचाव, पैरों में खिंचाव और जांघों में खिंचाव है। जब पूरे शरीर में यह अकड़न छा जाती है, तो इसे कौन रोक सकता है? इसे सिद्धगुरु नरसिंह देव रोक सकते हैं और कल्पवृक्ष के समान भगवान कृष्ण रोक सकते हैं। गुरु की आज्ञा से इस मंत्र को स्वीकार करके, मैं सच्चे मन से इस व्यक्ति की अकड़न को झाड़कर दूर करता हूँ। नरसिंह गुरु की दुहाई है। यह कामरूप कामाख्या देवी और देवी चंडी की आज्ञा से सिद्ध हो।

### 3. विधि (Process)

छवि में दी गई विधि का सरल हिंदी रूपांतरण:

 * सामग्री: थोड़ा सा पुराना 'अबीर' (गुलाल)।

 * प्रक्रिया: ऊपर दिए गए मंत्र को पढ़ते हुए अबीर को तीन बार अभिमंत्रित करें (यानी मंत्र पढ़कर अबीर पर फूंक मारें)।

 * प्रयोग: शरीर के जिस हिस्से में अकड़न (खि़ल) या नसों का खिंचाव महसूस हो रहा हो, वहाँ इस अभिमंत्रित अबीर से मालिश करें। मान्यतानुसार इससे रोग में आराम मिलता है।

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