भारतीय तंत्र और मंत्र विज्ञान में शाबर मंत्रों को उनके त्वरित और अचूक प्रभाव के लिए जाना जाता है। "गणेश कुंजी शाबर मंत्र" अपने आप में एक 'स्वयं सिद्ध' महामंत्र है, जिसे किसी लंबी, जटिल या कठिन तांत्रिक अनुष्ठानिक विधि से सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती। यह मंत्र आध्यात्मिक जगत और ब्रह्मांड के गुप्त द्वारों को खोलने वाली एक दिव्य कुंजी (चाबी) के समान माना गया है, जो साधक की मुख्य साधनाओं को निर्विघ्न पूर्ण कराता है।
| विषय | नियम व निर्देश |
| मुख्य उद्देश्य | किसी भी नई साधना, अनुष्ठान या शुभ कार्य में आने वाले विघ्नों को दूर कर सफलता का द्वार खोलना। |
| मंत्र की प्रकृति | स्वयं सिद्ध (इसे अलग से सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती)। |
| शुभ समय | अपनी मुख्य साधना या किसी भी नए कार्य को प्रारंभ करने के ठीक पहले। |
| मंत्र आवृत्ति | पूरी श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण के साथ कुल ११ (11) बार पाठ। |
| मुख्य ध्यान | पाठ के समय अपने दीक्षा गुरु (या परमगुरु) और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का मानसिक स्मरण। |
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इस शाबर मंत्र की संरचना बेहद दिव्य है, जो ब्रह्मांड की विभिन्न अलौकिक शक्तियों को एक सूत्र में पिरोती है। इसके मुख्य स्तंभ निम्नलिखित हैं:
आदेश और गुरु वंदना: मंत्र की शुरुआत गुरु के 'आदेश' से होती है, जो नाथ पंथ और शाबर परंपरा का मूल स्तंभ है। गुरु की आज्ञा मिलते ही साधक की चेतना जाग्रत हो जाती है।
गणेश आगमन: विघ्नहर्ता भगवान गणेश का आवाहन किया जाता है, जो अपने साथ साधक के जीवन में रिद्धि-सिद्धि (बुद्धि, विवेक और प्रचुर समृद्धि) लेकर आते हैं।
दिव्य चाबियाँ (कुंजी): इस मंत्र में देवताओं की रक्षक शक्ति, तंत्र की अधिष्ठात्री माता हिंगलाज की ज्ञान रूपी चाबी, नवग्रहों को अनुकूल करने वाली 'कंठ कुंजी' और स्वयं योगिराज गुरु गोरखनाथ जी की सिद्ध कुंजी का समावेश है।
कपाट खुलना: जब ये सभी महाशक्तियां एक साथ जाग्रत होती हैं, तो ब्रह्मांड के बंद कपाट (अर्थात गुप्त मार्ग, रुकी हुई सिद्धियां और भाग्य के द्वार) तुरंत खुल जाते हैं और साधक को ऐश्वर्य की अनुभूति होने लगती है।
यदि आप कोई नई साधना, नया मंत्र अनुष्ठान, व्यापार, या जीवन में कोई भी शुभ कार्य शुरू करने जा रहे हैं, तो उसमें शत-प्रतिशत सफलता सुनिश्चित करने के लिए इस 'कुंजी' का प्रयोग इस प्रकार करें:
चरण १: अपनी मुख्य साधना या नए कार्य के आसन पर बैठने के बाद सबसे पहले शांत चित्त हो जाएं।
चरण २: अपने मन में अपने गुरुदेव का स्मरण करें और भगवान श्री गणेश जी के वरदहस्त रूप का ध्यान करें।
चरण ३: अब ऊपर दिए गए स्वयं सिद्ध गणेश कुंजी शाबर मंत्र का ११ बार पूरी एकाग्रता और शुद्ध ध्वनि के साथ पाठ करें।
चरण ४: ११ बार पाठ पूर्ण होने के बाद, यह भावना करें कि आपके कार्य के मार्ग की सभी बाधाएं दूर हो चुकी हैं। इसके बाद अपनी मुख्य साधना या कार्य को बेझिझक प्रारंभ करें।
यह मंत्र सचमुच "ब्रह्मांड की मास्टर की (Master Key)" की तरह काम करता है। साधक जिस भी मनोकामना, सिद्धि या विशेष वस्तु को प्राप्त करने के लिए अपनी मुख्य साधना शुरू करता है—वह सफलता यदि भाग्य या ब्रह्मांड के किसी कोने में रुकी या छिपायी गई हो—तो यह कुंजी मंत्र उस सफलता के द्वार के ताले को तुरंत खोल देता है। इसके प्रभाव से मुख्य साधना में आने वाले मानसिक भटकाव, शारीरिक कष्ट या दैविक विघ्न पहले ही समाप्त हो जाते हैं।
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