तंत्र-मंत्र शास्त्र की दुनिया में जब बड़े से बड़े उपाय, साधनाएं और मंत्र विफल हो जाते हैं, तब जन्म होता है इस अचूक और अंतिम श्रेणी के बंगाली मंत्र का। यह क्रिया तंत्र विज्ञान का वह अंतिम अस्त्र है, जिसके सामने भयानक से भयानक और सदियों पुरानी प्रेतात्मा या पेत्नी (प्रेतनी) भी टिक नहीं पाती। यदि कोई पीड़ित व्यक्ति लंबे समय से किसी अदृश्य नकारात्मक शक्ति के चंगुल में है, तो यह विधि उसे तुरंत और स्थायी मुक्ति दिला सकती है।
यह एक बेहद उग्र और खतरनाक तांत्रिक क्रिया है। इसमें जरा सी भी चूक साधक या पीड़ित के लिए घातक हो सकती है। इसलिए, साधना शुरू करने से पहले निम्नलिखित सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य है:
स्वयं की सुरक्षा: साधना शुरू करने से पहले साधक (ओझा/तांत्रिक) को स्वयं का 'तांत्रिक ताबीज' अवश्य धारण करना चाहिए।
रक्षा कवच: साधना स्थल पर बैठने से पहले अपने चारों ओर 'सुरक्षा मंत्र' का प्रयोग करके अभिमंत्रित घेरा (लक्ष्मण रेखा) बना लें।
कात्री जल की व्यवस्था: प्रेतात्मा शरीर छोड़ते समय अत्यंत उग्र रूप धारण कर सकती है। इससे बचने के लिए 'कात्री मंत्र' से सिद्ध किया हुआ जल पहले से पास रखें, ताकि उग्रता बढ़ने पर पीड़ित पर छिड़काव किया जा सके।
इस क्रिया को अत्यंत सावधानी के साथ निम्नलिखित चरणों में पूरा किया जाता है:
पीड़ित व्यक्ति को शाम के समय (सूर्यास्त के समय या उसके बाद) घर के खुले आंगन में लाएं और उसका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर करके बैठाएं।
ओझा/तांत्रिक सबसे पहले 'बन बन कार बाप' नामक सिद्ध मंत्र का जाप करते हुए अपने और रोगी के चारों ओर एक सुरक्षात्मक घेरा खींचेंगे, ताकि कोई बाहरी नकारात्मक शक्ति बाधा न डाल सके।
एक सुरक्षित पात्र या हवन कुंड में निम्नलिखित तीन दुर्लभ सामग्रियों को एक साथ रखकर जलाएं:
मरे हुए बैल की खोपड़ी (कपाल का हिस्सा)।
बेर (कुल) के पेड़ की सूखी लकड़ी।
मयना के पेड़ की सूखी डाल।
उपरोक्त सामग्रियों के जलने के बाद प्राप्त हुई राख (भस्म) को एक पात्र में इकट्ठा करें। अब मुख्य बंगाली मंत्र का 21 बार स्पष्ट उच्चारण करते हुए उस राख पर फूंक मारें। मंत्र में जहाँ 'अमुके' शब्द आता है, वहाँ पीड़ित व्यक्ति का नाम लिया जाता है।
साधक अपने एक हाथ में बैल की एक छोटी हड्डी और आग में भुना हुआ मुर्गी का पंख धारण करेगा। इसके बाद, अभिमंत्रित राख को पीड़ित के शरीर पर छिड़कना शुरू करें। मंत्र और सामग्री के तेज से पेत्नी (प्रेतनी) तुरंत शरीर छोड़कर सदा के लिए भाग जाएगी। इसके तुरंत बाद रक्षा ताबीज पहनाकर रोगी के शरीर को कीलित (लॉक) कर दें।
नोट: तांत्रिक क्रियाएं पूर्णतः निष्ठा, शुद्ध उच्चारण और सटीक विधि पर निर्भर करती हैं। यदि आपको मंत्र के उच्चारण, सामग्री को जुटाने या सुरक्षा चक्र को लेकर किसी भी प्रकार का संदेह या शंका हो, तो बिना विशेषज्ञ के परामर्श के इसे स्वयं करने का प्रयास कतई न करें।
No review given yet!
Fast Delivery all across the country
Safe Payment
7 Days Return Policy
100% Authentic Products