यह अत्यंत उग्र और तीव्र बंगाली तंत्र मंत्र है। इसका उपयोग मुख्य रूप से वशीकरण के लिए किया जाता है। यह क्रिया अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है, जिसके प्रभाव से साधक अपनी मनोवांछित सिद्धि प्राप्त करता है।
यह साधना केवल कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात्रि (नशीथ काल/मध्यरात्रि) में ही संपन्न की जा सकती है। इसके लिए 'शव' (मृतक) की अस्थि या 'डंभ' (अस्थि का टुकड़ा) की आवश्यकता होती है।
एकांत स्थान पर बैठकर पूरी एकाग्रता के साथ इस मंत्र का केवल 7 बार जाप करें। यह मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है, इसलिए इसे अत्यंत सावधानी और एकाग्रता के साथ करना आवश्यक है।
मंत्र जप पूर्ण होने के बाद, अभिमंत्रित अस्थि या डंभ को मनोवांछित स्त्री के मस्तक (सिर) पर या उसके ऊपर डाल दें।
चेतावनी: तांत्रिक ग्रंथों के अनुसार, जब तक वह स्त्री साधक से संपर्क नहीं करती, तब तक उसके शरीर में तीव्र दाह (जलन), शारीरिक कमजोरी और मूर्च्छा की स्थिति बनी रह सकती है। यह एक अत्यंत तीव्र प्रयोग है, अतः इसे करने से पूर्व अपनी सुरक्षा और गुरु का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है।
यह प्रयोग वशीकरण के क्षेत्र में सबसे तीव्र और प्रभावी माना जाता है। पूर्ण श्रद्धा और विधि के पालन से साधक को अपने लक्ष्य की प्राप्ति होती है।
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