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आयुर्वेदिक केश रक्षक तेल
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केश रक्षक आयुर्वेदिक तेल एक पूर्णतः प्राकृतिक और पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धति से निर्मित तेल है। यह बालों की लगभग सभी समस्याओं जैसे झड़ना, असमय सफेद होना, डैंड्रफ और रूखेपन के लिए एक रामबाण समाधान है।

1. मुख्य जड़ी-बूटियों का परिचय
* आंवला (Amla): विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, यह बालों की जड़ों को मजबूत करता है और प्राकृतिक रूप से काला बनाए रखता है।
* शिकाकाई (Shikakai): इसे ‘बालों का फल’ कहा जाता है। यह प्राकृतिक क्लींजर है जो बालों के pH स्तर को बनाए रखता है।
* घृतकुमारी (Aloe Vera): यह स्कैल्प को नमी प्रदान करता है और खुजली या जलन को शांत करता है।
* जटामासी (Jatamansi): यह तनाव कम करने और बालों के विकास (Growth) को तेज करने के लिए प्रसिद्ध है।
* भृंगराज (Bhringraj): इसे ‘केशराज’ कहा जाता है। यह बालों को घना बनाने और गंजेपन को रोकने में सबसे प्रभावशाली है।
* अमर बेल (Amarbel): यह बालों की लंबाई बढ़ाने और डैंड्रफ को जड़ से खत्म करने में सहायक है। ऐसी 21 प्रकार के जड़ी बूटियां का प्रयोग करके यह तेल निर्माण किया जाता है//
2. लाभ एवं चमत्कार (Benefits)
* बालों का झड़ना बंद: पहले हफ्ते के उपयोग से ही बालों का टूटना कम हो जाता है।
* नया विकास: सुप्त रोमछिद्रों (Hair Follicles) को सक्रिय कर नए बाल उगाने में मदद करता है।
* मानसिक शांति: जटामासी और भृंगराज के कारण गहरी नींद आती है और मानसिक तनाव कम होता है।
* सफेद बालों से मुक्ति: नियमित प्रयोग से बाल जड़ से काले और चमकदार बनते हैं।
3. निर्माण विधि (Production Method)
आयुर्वेद में इसे ‘तैल पाक विधि’ कहा जाता है:
* कल्क बनाना: सभी सूखी जड़ी-बूटियों (आंवला, शिकाकाई, जटामासी, भृंगराज) का बारीक चूर्ण बनाकर पानी के साथ पेस्ट (कल्क) बना लें।
* आधार तेल: लोहे की कड़ाही में तिल का तेल या नारियल का तेल गरम करें।
* मिश्रण: तेल में जड़ी-बूटियों का पेस्ट और घृतकुमारी का ताज़ा रस मिलाएं।
* मंद आंच: इसे अत्यंत धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि सारा पानी जल न जाए और केवल तेल शेष रह जाए।
* छानना: तेल ठंडा होने पर इसे सूती कपड़े से छान लें और कांच की बोतलों में भर दें।
4. उपयोग की विधि (How to Use)
* तरीका: रात को सोने से पहले उंगलियों के पोरों से स्कैल्प पर हल्की मालिश करें।
* अवधि: सप्ताह में कम से कम 3 बार लगाएं।
* धोना: सुबह किसी माइल्ड आयुर्वेदिक शैम्पू से बाल धो लें।

विशेष निर्देश _ हमारे केंद्र द्वारा प्रदान की गई मंत्र विद्या, यंत्र विद्या, सिद्ध सामग्री ,एवं आयुर्वेदिक औषधि एवं अन्य किसी भी सामग्री का हम आधिकारिक रूप से कोई भी गारंटी या जिम्मेदारी नहीं लेते,, आप चैनल के विश्वास एवं चमत्कार देखकर के स्वयं या दूसरों के हित के लिए प्रयोग कर सकते हैं ,,धन्यवाद


एक पूर्णतः प्राकृतिक और पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धति से निर्मित तेल है। यह बालों की लगभग सभी समस्याओं जैसे झड़ना, असमय सफेद होना, डैंड्रफ और रूखेपन के लिए एक रामबाण समाधान है।

1. मुख्य जड़ी-बूटियों का परिचय
* आंवला (Amla): विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, यह बालों की जड़ों को मजबूत करता है और प्राकृतिक रूप से काला बनाए रखता है।
* शिकाकाई (Shikakai): इसे ‘बालों का फल’ कहा जाता है। यह प्राकृतिक क्लींजर है जो बालों के pH स्तर को बनाए रखता है।
* घृतकुमारी (Aloe Vera): यह स्कैल्प को नमी प्रदान करता है और खुजली या जलन को शांत करता है।
* जटामासी (Jatamansi): यह तनाव कम करने और बालों के विकास (Growth) को तेज करने के लिए प्रसिद्ध है।
* भृंगराज (Bhringraj): इसे ‘केशराज’ कहा जाता है। यह बालों को घना बनाने और गंजेपन को रोकने में सबसे प्रभावशाली है।
* अमर बेल (Amarbel): यह बालों की लंबाई बढ़ाने और डैंड्रफ को जड़ से खत्म करने में सहायक है। ऐसी 21 प्रकार के जड़ी बूटियां का प्रयोग करके यह तेल निर्माण किया जाता है//
2. लाभ एवं चमत्कार (Benefits)
* बालों का झड़ना बंद: पहले हफ्ते के उपयोग से ही बालों का टूटना कम हो जाता है।
* नया विकास: सुप्त रोमछिद्रों (Hair Follicles) को सक्रिय कर नए बाल उगाने में मदद करता है।
* मानसिक शांति: जटामासी और भृंगराज के कारण गहरी नींद आती है और मानसिक तनाव कम होता है।
* सफेद बालों से मुक्ति: नियमित प्रयोग से बाल जड़ से काले और चमकदार बनते हैं।
3. निर्माण विधि (Production Method)
आयुर्वेद में इसे ‘तैल पाक विधि’ कहा जाता है:
* कल्क बनाना: सभी सूखी जड़ी-बूटियों (आंवला, शिकाकाई, जटामासी, भृंगराज) का बारीक चूर्ण बनाकर पानी के साथ पेस्ट (कल्क) बना लें।
* आधार तेल: लोहे की कड़ाही में तिल का तेल या नारियल का तेल गरम करें।
* मिश्रण: तेल में जड़ी-बूटियों का पेस्ट और घृतकुमारी का ताज़ा रस मिलाएं।
* मंद आंच: इसे अत्यंत धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि सारा पानी जल न जाए और केवल तेल शेष रह जाए।
* छानना: तेल ठंडा होने पर इसे सूती कपड़े से छान लें और कांच की बोतलों में भर दें।
4. उपयोग की विधि (How to Use)
* तरीका: रात को सोने से पहले उंगलियों के पोरों से स्कैल्प पर हल्की मालिश करें।
* अवधि: सप्ताह में कम से कम 3 बार लगाएं।
* धोना: सुबह किसी माइल्ड आयुर्वेदिक शैम्पू से बाल धो लें।

विशेष निर्देश _ हमारे केंद्र द्वारा प्रदान की गई मंत्र विद्या, यंत्र विद्या, सिद्ध सामग्री ,एवं आयुर्वेदिक औषधि एवं अन्य किसी भी सामग्री का हम आधिकारिक रूप से कोई भी गारंटी या जिम्मेदारी नहीं लेते,, आप चैनल के विश्वास एवं चमत्कार देखकर के स्वयं या दूसरों के हित के लिए प्रयोग कर सकते हैं ,,धन्यवाद


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