तंत्र शास्त्र और शाबर परंपरा का यह एक अचूक नियम है कि साधना काल में सुरक्षा के उद्देश्य से जब आसन को कीलित (बाँधा) जाता है, तो साधना की समाप्ति के पश्चात् उसे खोलना भी उतना ही अनिवार्य होता है। यदि आसन न खोला जाए, तो अनुष्ठान से उत्पन्न दिव्य ऊर्जा का प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है और साधक के भीतर उसका सही समावेश नहीं हो पाता।
"आसन विमुक्ति बंगाली मंत्र" अपने आप में एक अत्यंत तीव्र और स्वयं सिद्ध मंत्र है, जो पूर्व में किए गए आसन के कीलन को तत्काल प्रभाव से शांत, संतुलित और मुक्त करता है।
जब हम साधना के अंत में इस स्वयं सिद्ध मंत्र का प्रयोग करते हैं, तो यह आसन के चारों ओर निर्मित सुरक्षा घेरे को सम्मानपूर्वक विसर्जित करता है। इससे साधना के दौरान अर्जित की गई उच्च आध्यात्मिक ऊर्जा साधक के सूक्ष्म शरीर में सुरक्षित रूप से समाहित हो जाती है और भूमि पर कदम रखते समय ऊर्जा का क्षय (Loss of Energy) नहीं होता।
(नोट: वेबसाइट पर मुख्य महामंत्र का मूल और शुद्ध पाठ साधकों की दीक्षा के अनुसार नीचे प्रस्तुत किया जाता है।)
नए साधकों और तंत्र मार्ग के छात्रों की सुगमता के लिए इस मंत्र के प्रयोग की विधि को क्रमबद्ध रूप से नीचे समझाया गया है:
इस स्वयं सिद्ध बंगाली विधान को अपनाते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखें:
वाणी की शुद्धता (Local Tone): बंगाली मंत्रों में शब्दों का उच्चारण उनके स्थानीय प्राकृत रूप और लहजे में ही किया जाता है (जैसे 'महादेव' को 'मोहादेबेर' या 'आसन' को 'आसोन' बोलना)। मंत्र की इस मूल ध्वनि और टोन में बदलाव न करें, क्योंकि ध्वनि तरंगें ही इसकी वास्तविक शक्ति हैं।
भारी अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं: यह एक स्वयं सिद्ध मंत्र है, अतः इसके लिए किसी अलग या कठिन अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं है। केवल आपकी एकाग्रता, शुद्ध उच्चारण और गुरु-आज्ञा ही इसे प्रभावी बनाने के लिए पर्याप्त है।
ऊर्जा संतुलन: आसन खोलने की यह क्रिया साधक को मानसिक और शारीरिक रूप से पुनः सामान्य वातावरण में लौटने में मदद करती है और किसी भी प्रकार के आध्यात्मिक भारीपन को दूर करती है।
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