क्या आप साधना के समय एकाग्रता की कमी महसूस करते हैं? या साधना काल में किसी अज्ञात भय या नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से परेशान हैं? तंत्र शास्त्र और शाबर परंपरा में "आसन बंधन मंत्र" का स्थान सर्वोपरि है। साधना शुरू करने से पहले अपने स्थान को कीलित (सुरक्षित) करना सबसे पहला और अनिवार्य नियम है।
यह बंगाली शाबर मंत्र अपने आप में "स्वयं सिद्ध" है, जो साधना काल में साधक की सुरक्षा, मानसिक एकाग्रता और स्थान की पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए अचूक माना जाता है। इसके प्रयोग से कोई भी नकारात्मक ऊर्जा या बाहरी अदृश्य बाधा आपकी साधना में विघ्न नहीं डाल सकती।
बंगाली तंत्र मंत्रों की प्रभावशीलता को गहराई से समझने के लिए इसके शब्दों के अर्थ को जानना आवश्यक है:
आकाश-पातालो बांधूँ: दसों दिशाओं के साथ-साथ आकाश और पाताल (संपूर्ण ब्रह्मांड) को साधक के लिए सुरक्षित करना।
अष्टो दख्खा बांधु: आठों दिशाओं को कीलित करना ताकि कोई भी नकारात्मकता प्रवेश न कर सके।
आसोन-बासोन बांधूँ: अपने बैठने के स्थान (आसन) और आसपास के वस्त्र व संपूर्ण वातावरण को पवित्र और सुरक्षित करना।
मोहादेबेर बांधे: देवों के देव महादेव (भगवान शिव) की अमोघ शक्ति और मर्यादा से इस दिव्य बंधन को बांधना।
कामरु कामाक्ष्या मायेर आग्याय: तंत्र की अधिष्ठात्री देवी, मां कामरू कामाख्या की दिव्य आज्ञा से इस लोक-कल्याणकारी कार्य को संपन्न करना।
(नोट: वेबसाइट पर मुख्य महामंत्र का मूल पाठ दीक्षा के अनुसार या शुद्ध बंगाली टोन के साथ नीचे प्रस्तुत किया जाता है।)
नए साधकों और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले छात्रों के लिए इस विधि को अत्यंत सरल शब्दों में नीचे समझाया गया है:
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